नदियों में बढ़ते जल स्तर को देखते हुए अपर जिलाधिकारी ने सावधानियां बरतने के दिए निर्देश

0
75
Oplus_131072

उन्नाव।अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) नरेन्द्र सिंह ने बताया है कि वर्तमान समय में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से डूबने व सर्पदंश की घटनाएं ज्यादा होती है, ऐसी दशा में तेज धार या उफनायी हुई नदी, नहर, नाले तालाब आदि में स्वयं एवं अपने स्वजनों को जाने से रोकें, यदि स्नान करना जरूरी हो तो उतरने समय गहराई का ध्यान रखें। यदि तैरना जानते हो तभी पानी में उतरें/स्नान करे। एक साथ परिवार के कई लोग नदी या अन्य घाटों पर स्नान न करें। बच्चों को यदि स्नान करना हो तो बड़ों की कुशल देख-रेख में ही स्नान करायें। बच्चों को पुल, पुलिया, ऊॅचे टीलों से पानी में कूद कर स्नान करने से रोके। सामूहिक रूप से स्नान करते समय साथ 10-15 मीटर लम्बी रस्सी या धोती/साड़ी अवश्य रखे। स्नान घाटों पर लिखी हुई चेतावनी अवश्य पढें। छोटे बच्चों को घाटों, जल निकायों के समीप न जाने दें। अनजान एवं सुनसान नदियों, नहरों, तालाबों के घाटों पर स्नान करने न जायें। किसी के उकसावे/बहकावें में आकर पानी में छलांग न लगाये। नदियों, नहरों या अन्य जल निकायों के घाटों पर पारंपरिक/धार्मिक/सामाजिक रीति-रिवाजों/अनुष्ठान/संस्कारों का निर्वहन करते समय किसी भी तरह की असावधानी न बरते। तैरते या पानी में स्नान करते समय स्टंट न करें या सेल्फी आदि न ले।

उन्होने बताया है कि इस मौसम में सर्पदंश की घटनाएं अधिक होती है। ऐसी घटनाएं होने पर या सर्प के काटने पर पीड़ित व्यक्ति को किसी भी प्रकार की शारीरिक क्रिया न करने दे। व्यक्ति की घबराहट दूर करें घबराहट से शरीर में जहर तेजी से फैलता है। मरीज के घाव से किसी भी प्रकार की छेड़-छाड़ न करे। घाव को साबुन पानी से धुले। घाव के आसपास से घड़ी, कड़ा, अंगुठी इत्यादि चीजों को तुरन्त उतार दे। जल्द से जल्द मरीज को अस्पताल ले जाये। पीड़ित व्यक्ति को चिकित्सालय स्थानान्तरित होने के उपरान्त जल्द ही एन्टीवेनम दिया जाना चाहिए। सांप के जहर को चूस कर निकालने की कोशिश न करे। बिना चिकित्सीय सलाह किसी भी प्रकार की दवा मरीज को न दे। सपेरे अथवा तांत्रिक के चक्कर में न पड़े। सर्पदंश वाले भाग को रस्सी व पट्टी से न बाॅधे।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here