श्री रामलला मन्दिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन फिजियोथेरेपिस्टो ने की श्रीराम स्तुति,21 सौ दीप जलाकर मनाया दीपोत्सव

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कानपुर : श्री रामलला नगरी अयोध्या में 500 साल की लंबे संघर्ष, त्याग व तपस्या के बाद धूम-धाम से भगवान श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो गयी। इससे करोड़ों सनातनियों में खुशी की लहर है। श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन “द इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ फिजियोथेरेपिस्ट उत्तर प्रदेश” द्वारा पं दिन दयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय सभागार में राम स्तुति और महाआरती के कार्यक्रम का आयोजन किया गया फिजियोथेरेपिस्ट डाक्टरों ने 21 सौ दीप जलाकर दीपोत्सव भी मनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ सुधीर कुमार द्विवेदी और संचालन डॉ प्रत्यूष विक्रम सिंह ने किया।

कार्यक्रम में जर्नलिस्ट क्लब के महामंत्री अभय त्रिपाठी को श्रीरामजन्मभूमि का प्रतीक चित्र, भगवा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए अभय त्रिपाठी ने कहा कि राम इस देश का गौरवशाली इतिहास ही नहीं बल्कि एक संस्कृति और मर्यादा के सर्वोच्च मानदंड के जीवंत प्रतीक और आदर्श भी हैं। इस राष्ट्र की हजारों वर्ष की सनातन परंपरा के लोकनायक और मूलपुरुष हैं। भगवान राम राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं, वे राष्ट्र की आत्मा हैं। श्रीराम एक सार्वभौमिक ऊर्जा है जो सबको एक सुखद और जीवंत ऊर्जा प्रदान करती है। यही कारण है दुनिया भर के आस्थावान लोग एक राजा, पति, मित्र, पिता, भाई और प्रभु के रूप में भगवान श्री राम और उनके आदर्शों व सिद्धांतों का सम्मान करते हैं। मन, मस्तिष्क अथवा मानव को प्रकाशित करने का सबसे सुलभ साधन है राम नाम।


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