एचपीएलसी लैब का प्राचार्य ने किया उद्घाटन – देश भर में डेढ़ लाख बच्चे मेजर थैलेसीमिया से पीड़ित – आठ लाख की कीमत से अस्पताल में लगी एचपीसीएल मशीन

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हरिशंकर शर्मा
कानपुर। स्त्री प्रसूति रोग विभाग में नवरात्रि के नवमी के शुभ दिवस को एचपीएलसी लैब का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य डॉ. संजय काला एवं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीना गुप्ता द्वारा किया गया। उद्घाटन के उपरान्त विभागध्यक्ष ने मशीन की विशेषताएं बताई।
विभागध्यक्ष डॉक्टर नीना गुप्ता ने बताया कि इस लैब के माध्यम से थैलेसीमिया जैसी अनुवंशिक बीमारी तथा अन्य हिमोग्लोबिनोपैथी की जाँच में बहुत सुविधा होगी। तथा यह जाँचे पूरी तरह से निःशुल्क होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत में थैलेसीमिया मेजर के लगभग एक से डेढ लाख बच्चे है। प्रतिवर्ष 10 से 15000 थैलेसीमिया मेजर के बच्चे पैदा होते है। उन बच्चो के उपचार में इनको बार-बार खून चढाना होता है। जिससे अक्सर बच्चे आयरन ओवरलोड में भी चले जाते है जो कि उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसके साथ ही पूर्ण रूप से ठीक होने के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लंट जिसमें एचएलए समान हो अर्थात आईडेंटिकल दाता द्वारा ही किया ही जा सकता है जो कि समान्य स्थिति में लगभग असंभव उपचार है। थैलेसीमिया सिकल सेल एनीमिया व अन्य हिमोग्लोबिनोपैथी की जांच व रोकथाम हेतु एनएचएम द्वारा गाइडलाइन बनाई गयी । जिसमे प्रायमरी प्रीवेशन में थैलेसीमीया के करियर की पहचान व कैरियर के बीच में शादी ना हो तथा सेकेंडरी प्रिवेंशन में थैलेसीमिया संभावित बच्चो के जन्म को रोकना है। इसी के अंतर्गत विभाग में गर्भवती महिलाओं में थैलेसीमिया की जांच कराने हेतु लैब का उद्घाटन किया गया। यदि महिलाए थैलेसीमिया माइनर हो तो वह उसका पति भी थैलेसीमिया हो तो 25 प्रतिशत बच्चे थैलेसीमिया मेजर, 50 प्रतिशत कैरियर व 25 प्रतिशत सामान्य पाए जाते है। एनएचएम गाइडलाइन के अनुसार गर्भवस्था में कराई जाने वाली जांचे जैसे एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, डाइबिटीज, थाइरॉएड इत्यादि के साथ थैलेसीमिया की जांच भी कराया जाना चाहिए जिसकी शुरूआत कर दी गई है। इसी क्रम में डा0 प्रतिमा वर्मा ने मीडिया के ामध्यम से आम जनमानस से अपील की है कि वह भी अपने परिवार को सुरक्षित रखने में सहयोग करे और अस्पाल आ कर थैलेसीमिया की जांच करवाए वह भी पूरी तरह से निःशुल्क। उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्य रूप से उप प्राचार्य डा0 रिचा गिरी, डाक्टर आर के सिंह ,डॉ, रेनु गुप्ता, सीएमएस डॉ रीता गुप्ता ,डॉ शैली अग्रवाल, डॉ गारिमा गुप्ता ,डॉ प्रतिमा वर्मा ,डॉ अरुण आर्य, डॉ लुबना खान, डॉ बंदना शर्मा, डा0 सुगंधा श्रीवास्तव समेत डाक्टर्स और स्टॉफ मौजूद रहा।

8 लाख की लागत से आयी एचपीसीएल मशीन
आठ लाख की लागत से हैलट के जच्चा बच्चा अस्पताल में आयी एचपीसीएल मशीन थैलेसीमिया की जांच करने वाली एक अत्याधुनिक मशीन है। जो थैलेसीमिया के प्ररंभिक और द्वितीय चरण को बताने में सहायक और सटीक परिणाम देने वाली है। इस बारे में लैब टेक्निकल अनुराग ने बताया कि यह अभी वर्तमान समय में केजीएमसी, एसजीपीजीआई, बलरामपुर हास्पिटल व चौथी मशील हैलट के जच्चा बच्चा में लगाई गई है। बाहर इसकी जांच लगभग एक हजार से डेढ़ हजार रूपये की होती है जबकि सरकार द्वारा प्रदान की गई यह मशीन अस्पताल में निःशुल्क जांच कर उसका इलाज भी करेगी।

थैलेसीमिया क्या है, क्या है इसका इलाज
थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है। यदि पैदा होने वाले बच्चे के माता-पिता दोनों के जींस में माइनर थैलेसीमिया होता है तो बच्चे में मेजर थैलेसीमिया हो सकता है जो काफी घातक होता है। किन्तु माता-पिता में से एक ही में माइनर थैलेसीमिया होने पर बच्चे को खतरा नहीं होता। थैलेसीमिया बच्चों को माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर मिलने वाला ब्लड डिसऑर्डर है। इस रोग के होने पर शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में बाधित होती है, जिसके कारण एनीमिया के लक्षण दिखाई देते हैं। इसकी पहचान तीन माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में खून की भारी कमी होने लगती है, जिसके कारण उसे बार-बार बाहर से खून की आवश्यकता पड़ती है। यदि माता-पिता दोनों को माइनर रोग है तब भी बच्चे को यह रोग होने के 25 प्रतिशत संभावना है। अतः यह जरूरी है कि विवाह से पहले महिला-पुरुष दोनों इस संबंध में अपना टेस्ट कराएं।


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