कानपुर। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की केंद्रीय कार्यशाला में तैनात पुराने स्टोर वाहनों के संचालन को लेकर एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। आरोप है कि रोडवेज अधिकारियों की मिलीभगत से न केवल अनफिट वाहनों को सड़कों पर चलाया गया, बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व की चोरी भी की गई। शिकायतकर्ता जयराम सिंह के अनुसार, वर्ष 1966 और 1976 मॉडल के कई वाहन, जिन्हें आरटीओ कानपुर ने 2001 में ही अनफिट घोषित कर दिया था, बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के वर्षों तक संचालित होते रहे। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि कई बसों की बॉडी हटाकर उन्हें अवैध रूप से ट्रक में तब्दील कर दिया गया। नियमतः इनका पुनः पंजीकरण और नए सिरे से कर निर्धारण होना चाहिए था, जो कभी नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय सहित शासन-प्रशासन को पांच बार भेजी जा चुकी है। आरोप है कि हर बार जांच समितियां गठित हुईं, लेकिन रसूखदार अधिकारियों और वाहन स्वामियों की साठगांठ के चलते रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नियमों के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक पुराने और अनफिट वाहनों का समय पर निस्तारण अनिवार्य है। लेकिन इन वाहनों को न तो नीलाम किया गया और न ही इनका बकाया कर जमा कराया गया। शिकायतकर्ता ने अब इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।




