बांगरमऊ,उन्नाव।नगर और क्षेत्र की सड़कों पर दौड़ते तीन पहिया ऑटो और ई-रिक्शा अब आम जनता के लिए सुविधा से ज्यादा ‘खतरा’ बनते जा रहे हैं। आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं ने यातायात सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज गति, नियमों की अनदेखी और अप्रशिक्षित चालक इस जानलेवा समस्या के मुख्य कारण बनकर उभरे हैं।
सड़कों पर सवारियां उठाने की होड़ में ऑटो चालक निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करते हैं। तीन पहिया वाहन का संतुलन तेज मोड़ पर बहुत खराब होता है, जिससे इनके पलटने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अक्सर देखा जाता है कि 3-4 सवारी की क्षमता वाले ऑटो में 8 से 10 लोगों को बैठाया जाता है। भारी वजन के कारण ब्रेक लगाने पर वाहन नियंत्रण से बाहर हो जाता है। शॉर्टकट के चक्कर में ऑटो चालक अक्सर मुख्य सड़कों और हाईवे पर गलत दिशा में वाहन चलाते हैं, जो भीषण टक्कर का मुख्य कारण बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ई-रिक्शा और कई ऑटो के ढांचों में ‘क्रंपल ज़ोन’ नहीं होता। टक्कर होने पर वाहन का लोहा सीधे सवारियों को चोट पहुँचाता है। हाल ही में सवारी से भरा एक तेज रफ्तार ऑटो स्कूटी को बचाने के चक्कर में पलट गया था जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मुख्य मार्गों पर तेज रफ्तार वाहनों और ई-रिक्शा के बीच टक्कर में आए दिन मौतें हो रही हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अब ई-रिक्शा के लिए भी ‘भारत NCAP’ की तर्ज पर सेफ्टी रेटिंग लाने पर विचार कर रहा है। कई राज्यों में हाईवे पर तीन पहिया वाहनों के चलने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच होने वाले हादसों को रोका जा सके। ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग प्रक्रिया होनी चाहिए। ऑटो के लिए अलग लेन या निश्चित रूट तय किए जाने चाहिए। पुलिस को ओवरलोडिंग और ओवरस्पीडिंग के खिलाफ सख्त अभियान चलाना होगा। यदि समय रहते इन “मौत के दूत” बनते वाहनों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो सड़कों पर चलना आम आदमी के लिए और भी दूभर हो जाएगा। प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों को भी जागरूक होना होगा कि वे क्षमता से अधिक सवारी वाले ऑटो में बैठने से बचें।




