बांगरमऊ, उन्नाव ।आसपास के क्षेत्रों में प्रतिबंधित हरे पेड़ों का अवैध कटान प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से जारी है लकड़कट्टे बेखौफ होकर आरा चला रहे हैं, जिससे इस अवैध कार्य में वन विभाग की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध बनी हुई है। हालात यह हैं कि हरे-भरे पेड़ गिरते जा रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई और आश्वासन तक सीमित हैं।
बांगरमऊ क्षेत्र के पलिया गांव में प्रतिबंधित पेड़ों का कटान चल रहा है। दिनदहाड़े पेड़ काटे जा रहे हैं और लकड़ी वाहनों से ले जाई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब अचानक नहीं हो रहा, बल्कि सुनियोजित तरीके से अवैध लकड़ी का कारोबार फल-फूल रहा है। इसके बावजूद अब तक किसी लकड़कट्टे पर कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
हरे पेड़ों के कटान से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। क्षेत्र की हरियाली उजड़ रही है और आने वाले समय में गर्मी व जल संकट और गहराने की आशंका है। इसके बावजूद वन विभाग की चुप्पी यह संकेत देती है कि या तो विभाग को हालात की जानकारी नहीं है या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदी जा रही हैं। इस मामले में वन क्षेत्राधिकारी नीरज कुमार विद्यार्थी ने जांच कर कार्रवाई की बात कही है, लेकिन सवाल यह है कि जब अवैध कटान खुलेआम चल रहा है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्षेत्रीय लोग ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग कब तक चुप्पी साधे रहता है और कब अवैध कटान पर लगाम लगती है।अवैध पेड़ कटान का यह कोई नया मामला नहीं है पिछले कुछ दिनों पर गौर करे तो गांव हसनपुर मजरा,मेला आलमशाह आदि गांवों सहित दर्जनों स्थानों पर हरे भरे पेड़ उजाड़ दिए गए किंतु वन विभाग सोता रह गया।




