बांगरमऊ,उन्नाव।स्थानीय तहसील के सामान्य समाज के वकीलों ने नागरिकों के साथ आज विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष/सचिव के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि आयोग द्वारा बनाया गया नियम सामान्य वर्ग के उत्पीड़न का हथियार बन जाएगा। मांग उठाई गई है कि न्याय संगत न होने के कारण इस प्रावधान को तत्काल वापस लिया जाए।
सामान्य वर्ग के अधिवक्ताओं और नागरिकों द्वारा उपजिलाधिकारी बृजमोहन शुक्ला को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लिया गया निर्णय सामाजिक समरसता को छिन्न-भिन्न कर देगा और समाज में जातीय संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में पठन-पाठन का माहौल भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। वकीलों का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा अन्य को प्रताड़ित करने आदि की रोकथाम के लिए भारतीय न्याय संहिता में पहले से ही प्रावधान हैं। इसलिए समता समिति गठित करने का कोई औचित्य नहीं है। वकीलों ने जोर दिया है कि आरक्षित वर्ग को विभिन्न भर्तियों में कोटा पूर्ण करने और उनकी प्रोन्नति सुनिश्चित करने के लिए ही समता समिति का गठन किया जाना न्याय संगत होगा । ज्ञापन में सामान्य वर्ग के छात्र छात्राओं के खिलाफ लाए गए यूजीसी के नए प्रावधान को तत्काल खारिज किए जाने की पुरजोर मांग उठाई गई है। ज्ञापन देते समय अविरल सिंह, संजीव दुबे, आलोक बाजपेई, गोविंद शुक्ला, कांग्रेस नेता राजीव बाजपेई, शैलेन्द्र शुक्ला, शशांक शेखर शुक्ला व कुशल तिवारी आदि नागरिक तथा आयुष शुक्ला, सुभाष चंद्र शुक्ला, अर्जुन सिंह, विपुल बाजपेयी, करुणा शंकर तिवारी, आदित्य कुमार व प्रवीण कुमार गुप्ता आदि अधवक्ता मौजूद रहे।




