उन्नाव।माननीय सर्वाेच्च न्यायालय तथा मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा फसल अवशेष को खेतों में जलाना दण्डनीय अपराध घोषित है।
फसलों अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के दृष्टिगत जनपद एवं तहसील स्तर एवं विकास खण्ड स्तर पर सेल का गठन करते हुये प्रत्येक दिन अनुश्रवण किया जा रहा है। खरीफ सत्र की फसले जैसे धान, मक्का गन्ना आदि फसलों के अवशेष/पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन सख्त कार्यवाही कर रहा है। जिसमें पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगाना व एफ0आई0आर0 दर्ज करना और उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित करना शामिल है। सैटेलाइट द्वारा पराली जलाने की प्रत्येक घटनाओं की निगरानी की जा रही है। पराली जलाने की घटना पाये जाने पर सम्बधित को दण्डित करने के सम्बन्ध में राजस्व विभाग द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम की धारा-24 के अन्र्तगत क्षतिपूर्ति की वसूली एवं धारा-26 के अन्र्तगत उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर सम्बधित के विरूध अर्थदण्ड इत्यादि की कार्यवाही की जायेगी। जिसमें जनपद के पराली जलाने वाले कृषक जिसमें बेनी पुत्र जालिम जसरापुर गंजमुरादाबाद , लालता पुत्र भरोसे ततियापुर बागरमऊ एवं रामखेलावन पुत्र दोना काजीपुर पर जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना इस प्रकार है।
दो एकड से कम जमीन वाले कृषक-5000.00 रूपये का जुर्माना दो से पाॅच एकड जमीन वाले कृषकों 10000.00 का जुर्माना एवं पाच एकड से अधिक किसान पर 30000.00 का जुर्माना निर्धारित किया गया है।




