पितरों को प्रेत योनि से मुक्त कराती हैं भागवत कथा मनुष्य के जीवन पर होता हैं संगति का प्रभाव

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बांगरमऊ,उन्नाव।श्री धाम वृंदावन से पधारे भागवताचार्य भारत भूषण महाराज ने श्री मदभागवत कथा में भागवत जी की महिमा का बखान करते हुए बताया कि भागवत कथा के श्रवण मात्र से प्रेत योनि में पड़े पितरो को भी मुक्ति भागवत कथा से हो जाती है ।
उन्होंने कथा के प्रसंग में धुंधकारी की कथा के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि धुंधकारी को संस्कार प्राप्त नहीं हुए तो वह बुरे कर्म करने लग़ गया । जबकि गोकर्ण पढ़ लिख कर के ज्ञानी बन गए । उन्होंने संस्कार को जीवन की सबसे बड़ी धरोहर बताते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन पर संस्कार बहुत बड़ा असर डालते हैं। अच्छे संस्कारो वाला व्यक्ति कभी भी गलत काम नहीं करता है। जबकि बुरी संगति में रहने वाला कभी भी सुधरता नही है। भारत भूषण महाराज ने सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ व्रत के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि करवाचौथ का व्रत प्रेम का प्रतीक है । महिलाओं के त्याग के आगे पति पर आने वाली बड़ी से बड़ी समस्या टल जाती हैं। माताओं को घर में अपने पति के साथ प्रेम से रहते हुए सुंदर और खुशहाल जीवन व्यतीत करना चाहिए।

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