कानपुर। जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मनोचिकित्सा विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कॉलेज ऑफ नर्सिंग के छात्र-छात्राओं द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर लघु नाट्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता और समय पर सहायता लेने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ धनंजय चौधरी ने बताया कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति (नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे, 2015-16) के अनुसार जीवनकाल प्रचलन दर 13.7% तथा वर्तमान प्रचलन दर 10.6% पाई गई। इसके साथ ही आत्महत्या के जोखिम का अनुमान 2.2% से 12.2% के बीच पाया गया। वहीं मानसिक विकारों में सर्वाधिक प्रभाव आयु वर्ग 40-49 वर्ष में देखा गया। उन्होंने बताया कि अवसाद की स्थिति महिलाओं में (3.0% बनाम 2.4%) जबकि नशे की लत पुरुषों में अधिक (9.1% बनाम 0.5%) रही। उपचार अंतर सामान्य मानसिक विकारों में 85%, गंभीर मानसिक विकारों में 74%, स्किज़ोफ्रेनिया में 75%, बाइपोलर डिसऑर्डर में 70% तथा अल्कोहल उपयोग विकारों में 86% पाया गया। पोएट्री मैं प्रथम स्थान रीता सिंह ने हासिल किया। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और पहुँच बढ़ाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है।
डॉ श्री चौधरी ने बताया कि 6 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक पांच दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों के बीच पोस्टर, पेंटिंग, रील मीम, पोएट्री एवं स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित की गई, एवं विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य विषय पर रचनात्मक तरीके से अपने विचार प्रस्तुत किए। बीपेंटिंग प्रतियोगिता प्रथम स्थान हिमांशी, द्वितीयः प्रीति मनी व तृतीयः दीक्षा यादव का रहा। जबकि स्लोगन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान स्वाती कश्यप ,द्वितीय रिजवान अंसारी व तृतीय स्थान विशाखा का रहा। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप डॉ. नवीन वी.एच. (प्रिंसिपल, कॉलेज ऑफ नर्सिंग), डॉ. राम कुमार एवं श्रीमती रेनू त्रिपाठी रही। कार्यक्रम का निर्देशन विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. धनंजय चौधरी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आयुषी सिंह एवं डॉ. कृतिका चावला द्वारा किया गया। इस अवसर पर सिनियर रेजिडेंट डॉ. अमन नक़वी, डॉ. अदिति गुप्ता एवं जूनियर रेजिडेंट डॉ. अब्दुल, डॉ. सौम्या, डॉ. अभिषेक एवं डॉ. आरुषि उपस्थित रहे।




