कानपुर।हम नारी सशक्तिकरण के इस अंक में बात कर रहे है, एक ऐसी महिला पार्षद की जिन्होंने छात्र राजनीति से जुड़े अपने पति से राजनीतिक के कुछ दांव पेंच सीखे और फिर एक ऐसा इतिहास रचा जिसकी कल्पना खुद उन्होंने ने भी नही की थी,यानी की साउथ सिटी के एक ऐसे वार्ड से वह पार्षद चुनी गईं, जहाँ पर एक ही परिवार के लोगों का 40 साल से सभासद यानी पार्षदी पर दबदबा कायम था,उनका नाम है वंदना शर्मा
*मध्यमवर्गीय परिवार से राजनीति का सफर*
साधारण परिवार से जुड़ी वंदना शर्मा जो वर्तमान समय में दबौली वार्ड-72 से पार्षद हैं, उन्होंने खुद कभी नही सोचा था कि, परिवार की जिम्मेदारी के बीच उन्हें जनता की भी सेवा करने का मौका मिलेगा, लेकिन ऐसा ही हुआ,और डीबीएस कॉलेज से अध्यक्ष रहे पति गुँजन लाल शर्मा से विवाह के बाद जो राजनीतिक गुण सीखे थे,उन्ही के आधार पार्षदी के चुनावी मैदान में जा डटी, और 40 साल के चक्रव्यूह को तोड़ते हुए जीत हासिल कर जनता का आशीर्वाद प्राप्त किया
*परिवार से बढ़कर उनके लिए जनता की सेवा सर्वोपरि*
चुनाव में जीत हासिल होने के बाद पार्षद वंदना शर्मा पर अब एक नही बल्कि पूरे वार्ड के परिवारों की जिम्मेदारी आ गई थी, ऐसे में उनके लिए परिवार को संभालने के साथ जनता के सुख और दर्द में शामिल होने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा,लेकिन वर्तमान समय में वह अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने का काम कर रही हैं, उनका मानना है की चुनौती और संघर्ष को ही असली जीवन कहते हैं
*घर-घर घँटी बजाकर जीत की हासिल*
सबसे खास और रोचक बात कह ले या फिर चुनौती, बीजेपी पार्टी के लिए पति समर्पित थे,जिसके आधार पर टिकट की मांग की लेकिन नही मिल सकी,मनोबल तो टूटा, लेकिन जो मन मे ठाना था उसे तो पूरा ही करना था,फिर क्या था चुनावी मैदान में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर हुंकार भरी, और जनता का विश्वास हासिल करने का काम किया।




