ख़ाकी पहनने के बाद बहुत कुछ सीखने को मिला-गीता सिंह

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कानपुर।एक कहावत कही गई है की समय बड़ा ही बलवान होता है, कुछ ऐसा ही हुआ एक किसान की बेटी के साथ जो पिछले 30 सालों से पुलिस विभाग को अपनी सेवा देने का काम कर रही हैं, हम बात कर रहे हैं कानपुर शहर में बतौर सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात गीता सिंह की जो वर्तमान समय में गोविंदनगर थाने की दादानगर चौकी प्रभारी के तौर पर तैनात है
*बनना चाहती थी डॉक्टर लेकिन पहन ली ख़ाकी*
मूलरूप से बनारस की रहने वाली गीता सिंह के साधारण परिवार से है पिता किसान थे,परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी सही नहीं थी,जितनी सही होनी चाहिए थी,परिवार में सिर्फ बहने ही थी,बायोलॉजी से Msc कर रही थी, इस दौरान सन्न 1994 में पुलिस विभाग में सिपाही की भर्ती निकली, तो परिवार के लोगों के कहने पर हिस्सा लिया और चयन हो गया, जिसके बाद फिर पीछे मुड़ कर नही देखा और तब से लगातार पुलिस विभाग को अपनी सेवाएं देने का काम कर रही हैं,
*सिपाही से बनी सब इंस्पेक्टर*
बतौर पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर भर्ती होने के बाद सब इंस्पेक्टर की परीक्षा में हिस्सा लिया और फिर उसमें भी परिवार के लोगों आशीर्वाद से चयन हुआ,लखनऊ से भर्ती हुई और लखनऊ के साथ कानपुर में कई जगह गीता सिंह की तैनाती रही,सब इंस्पेक्टर गीता सिंह के पति भी पुलिस विभाग में बतौर सब इंस्पेक्टर है और लखनऊ में इस समय तैनात है
*खुद के साथ ही समाज की सुरक्षा रही प्राथमिकता*
30 साल पुलिस विभाग को देने वाली सब इंस्पेक्टर गीता सिंह का कहना है की खुद के साथ परिवार और समाज की सुरक्षा उनकी सबसे पहले प्राथमिकता रहती है,समय के साथ बहुत कुछ समाज मे बदलते हुए उन्होंने देखा है,30 साल में अपराध की श्रेणी में भी बदलाव आया है


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